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साहित्यम: हमारे इश्क़ में रुस्वा हुए तुम, मगर हम तो तमाशा हो गए हैं...
मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती, हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
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