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साहित्यम: हाँ ,मैं हक़लाता हूँ हाँ ,शब्दों के बीच में अटक जाता हूँ... Firstnews24x7
रुक रुक के निकलती हैं बातें मेरी बोलते बोलते थमती हैं सांसे मेरी मजाक बनता हूँ रोज़ मैं ,सुबह और शाम रो रो के गुज़रती है राते मेरी
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