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साहित्यम: ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो राह-ए-आम तक न पहुंचे
उन्हें अपने दिल की ख़बरें मेरे दिल से मिल रही हैं मैं जो उन से रूठ जाऊं तो पयाम तक न पहुँचे
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