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आज फिर जीने को जी चाहता है
एक मुठ्ठी ज़मीन; एक टुकड़ा आसमाँ, थोड़ी सी हसी; थोड़ा सा ग़म मेहरबाँ, कही प्यार को तरसे, कही प्यार में…