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निर्वाण षटकम् - आदि शंकराचार्य | ‎Nirvana Shatkam - Adi Shankaracharya
आत्मषट्कम्, जिसे निर्वाणषट्कम् कहा जाता है, हिंदू दार्शनिक आदि शंकराचार्य द्वारा लिखित 6 श्लोक से मिलकर बना है। इसमें अद्वैत वेदांत की बुनियादी शिक्षाओं का सारांश, या गैर द्वैतवाद की हिंदू शिक्षाओं का सारांश है। यह 788-820 ई. के आसपास लिखा गया था। ऐसा कहा जाता है कि जब अदि गुरु आठ साल के छोटे बालक थे तब वो नर्मदा नदी के पास अपने गुरु की खोज में भटक रहे थे, वहा द्रष्टा गोविंदा भगवतपादा का सामना उनसे हुआ, जिन्होंने उनसे पूछा, "आप कौन हैं?" बालक ने इन्ही पदों के साथ उत्तर दिया, जिन्हें "निर्वाणषट्कम्" या "आत्मषट्कम्" के रूप में जाना जाता है। स्वामी गोविंदपाद ने अदि गुरु शंकराचार्य को अपने शिष्य के रूप में इसे सुन स्वीकार कर लिया था। इन छंदों को पढना और समझना आत्मानुभूति के लिए बहुत मूल्यवान माना जाता है।