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अटल बिहारी वाजपेयी जी और उनकी कवितायेँ!
"पथ पर चलते चलते ही वह राह बन गया, तिल-तिल कर जलते जलते ही दाह बन गया, वह कैसा था भक्त स्वयं भगवान बन गया कुम्भकार की कीर्ति बन निर्माण बन गया!" जब भी अटल जी पुरुषार्थ से भरी