main-yahan-hoon

DAY 3368

Malta                         June 17,  2017                   Sat 12:08 PM local time 




On Face Book .. a certain Navrang ji wrote a comment and I replied to him .. I wish to put it here .. its in Hindi, and I think many Hindi speaking Ef shall be able to translate it for the non Hindi speaking Ef ..


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FB 1658 - Mere pyaare doston .. ! ek bhai saheb hain NAVRANG ji , jinhone apne comments mein mujhe ye likh kar bheja .. maine use padha .. aur jawaab bhi diya ..
is baat ko main yahan chaap raha hoon .. taaki aap bhi use padh sakein ..
dhanyavaad .. !

Navrang Ji :

ये बताओ भाई बच्चन की तुम बचपन में क्या करते थे। क्या कभी गुल्ली डंडा या कंचे खेले है?
क्या कभी लट्टू चलाया है, लट्टू में कौन कौन से खेल होते है, एक ऐसा भी होता है जिसमे हारने पर सभी साथी हारने वाले का लट्टू को अपने लट्टुओं के वार से तोड़ देते है, उसको क्या कहते है।

क्या कभी गुलेल चलायी?
या साइकिल चलायी हो जैसे कूली में चलाते हो।
क्या कभी टायर भी चलाया है या टायर का खाली रिम चलाया है?

इसी तरह अनेको बाते है जो तुम नही बताते हो।
तुम सिर्फ पैसे कमाने की होड़ में लगे हो।

चलो ये बताओ की क्या तुम मुझे मिलने का मौका दे सकते हो ???

या फिर मुझे उन सभी की तरह तुम्हारे गेट के बाहर घण्टो घण्टो खड़ा हो के इंतेज़ार करके एक झलक ही देखने को मिलेगी???

मैं चाहता हु की तुम मुझको अपने हिसाब से मिलने के लिए बुलाओ या अपॉइंटमेंट दो जिस से की मैं जिंदगी रहते हुए आपके साथ एक फोटो खिंचवा सकू और बाते करु।

बताओ की इस कमेंट के जरिये क्या वाकई में तुम दरियादिल हो या सिर्फ दिखावटी हो।


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And my response :

जी भाई साहेब , … जितना कुछ आपने कहा है मैं उन सब को बचपन में कर चका हूँ .. और आज भी करता हूँ। . ..
गुल्ली डंडा खेला है , गुल्ली मरते समय एक बार मेरे दोस्त को आँख में लग गयी थी। . कांचा भी खेला हूँ। . जेब में कंचे अलग अलग रंग के रख के स्कूल पैदल जाता था। . और फिर allahabad की गर्मी में बाद में साइकिल पे। . लेकिन ज्यादा तर पैदल .. कांचा में सोडा (soda) बोतल की जो सोडा कांचा होता था उसे पाना बड़ी चीज़ होती थी… उसे हम sodri बोलते थे .. लट्टू भी चलाया है। . लेकिन इतनी अच्छी तरह नहीं चला पाता था , लेकिन जैसा की आपने कहा वो खेल ज़रूर खेलते थे हम। . .. ज़मीन पे लट्टू जब मारते थे , और रस्सी खींचते थे , तो लट्टू खूब ज़ोर से घूमता था , … फिर घुमते हुए उसे हाथ में उठा लेना एक कला होती थी ..
जामुन और अमरुद के पेड़ पे चढ़ कर जामुन और कच्चा अमरुद कभी खाया है आपने ..???
“आती बाती किसकी पाती” !!!। . ये खेल कभी खेला है आपने। . ?? जो den होता है उसे कहते हैं कि किसी एक पेड़ की पत्ती लाने को , और बाकी सब लोग छुप जाते हैं। . कभी खेला है आपने। .. ७ गोटी, पिट्ठू कभी खेले हो … ?? सारा बचपन ricksha, auto ricksha नहीं , आदमी जो पाव से चलता है वो ricksha , उसमें बीता है। . तांगा में बैठे हो कभी। .. मैं तोह गुदड़ी का लाल हूँ। .. गुदड़ी समझते हो ..?? टाट की बनी होती है। . एक बहुत ही कड़क कपडा होता है .. उसमे लपेट कर टांगे ( tonga ) में मुझे घर लाया गया था पैदा होने के बाद !! गर्मियों में न fan था और न airconditioner .. air conditioner तो Mumbai film industry में आने के बाद , एक film जब hit हुई , तब ख़रीदा मैंने … पहले तो , बर्फ ice का ढेला ज़मीन पे रख कर कमरे को ठंडा राखते थे .. और जब बाबूजी ने थोड़ा और कमाया तो खस ( khus ) की टट्टी पे पानी डाल कर कमरे को थोड़ा ठंडा रखते थे। .. सुतली की चारपाई पे सोते थे हम। .. और रात को गर्मी में हाथ का जो पंखा होता था उसे हाथ से चला घुमा के सोया करते थे।
और भाई साहेब जो कुछ भी अब हमारी स्थिति है वो हमें अपनी मेहनत की कमाई से मिली है। . खून पसीना लगा है उसमें .. हाँ हम पैसा कमाते हैं .. तो उसमें बुराई क्या है .. हर इंसान पैसा कमाता है .. ईमानदारी और लगन और मेहनत से काम करते हैं। .. ईश्वर की कृपा रही है , माता पिता का आशीर्वाद रहा है , और आप जैसे लोगों का प्यार और स्नेह। . … अपने आप को भाग्य शाली समझता हूँ ..
लेकिन भाई साहेब .. आपके कटु वचन आपको शोभा नहीं देते .. और आप उन लोगों की निंदा मत कीजोइये जो हर Sunday मेरे घर पे 35 साल से आ रहे हैं .. ये उनका प्यार है उनकी श्रद्धा है , जिसे मैं मरते दम तक कभी नहीं भूलूँ गा .. ये एक ऋण है जो मै कभी चूका नहीं सकूंगा .. उसका अपमान मत कीजिये …
रही बात photo की .. तो आपको मैं व्यक्तिगत रूप से समय निकाल कर नहीं दे पाऊंगा … आप Sunday को मेरे घर मेरे gate पे यदि दिख गए, तो फोटो खिंचवा लूँगा ..
मेरा स्नेह आदर आप के साथ। .. ~ Amitabh Bachchan

आरर। .!! एक बात तो भूल ही गए .. गुलेल खूब चलाए हैं , खुद ही लकड़ी काट के और cycle की दूकान से रद्दी tyre लेके उस से गुलेल बनाया है हमने .. और साइकिल tyre घुमा घुमा के डंडी से भी खेले हैं हम। . race लगाते थे हम , की कौन जीते गा tyre घुमा घुमा के ..tyre से याद आया , जब बाबूजी ने हमें एक cycle खरीद कर दी तो वो हमारे लिए अदभुत संपत्ति थी। .. puncture होता था , तो नया tyre नहीं खरीद सकते थे , उसी tyre को सड़क पे बैठा puncture वाले के पास puncture चिपका के ठीक करवा के फिर उसी tyre को wheel , पहिये पे चढ़ा के cycle को चालू करते थे। . …
और सुनिए भाई साहेब .. holi के त्यौहार में कभी ‘टेसू ’ के फूल का रंग बनाया है आपने ..पीला - गेरुआ रंग होता है उसका , सुन्दर और महक दार .. holi के एक दिन पहले उस फूल को पानी की बाल्टी में या एक बड़े tank या डमरू में डाल देते थे , सुबह उसका बढ़िया रंग बन जाता था … पिचकारी में भर के जब उसको मरते हैं तो शरीर पे बहुत सुन्दर लगता है। .. आज की तरह का रंग नहीं , जहाँ कालक पोत देते हैं मुँह पे। .. और chemical silver colour लगते हैं। . !!!
नमस्कार ~


Thank you .. the regular Blog shall also follow later ..

Love 

Amitabh Bachchan

youtube

Veer-Zaara, Main Yahan Hoon.

When my mum saw this, she was like, “That was so scandalous!”

Slakems and I just about died laughing! ;DDDDD

Watch on eatorangestilidie.tumblr.com

I’m already cheating and using two songs but I cannot pick between these two.

Watch on sparsh-may2012-oct2014-archive.tumblr.com

‘main yahan hoon’ is a song that I feel everytime I hear it, without fail. There’s just something in Udit Narayan’s voice that just makes me close my eyes and picture certain events in my life and certain people and, more importantly, the emotions that go with those events. It’s almost hypnotizing, but in a very tangible way.

8

Pighle neelam sa behta ye sama, neeli neeli si khamoshiyan, na kahin hai zameen na kahin aasmaan, sarsaraati hui tehniyaan pattiyaan, keh raheen hai bas ek tum ho yahan, bas main hoon,
meri saansein hain aur meri dhadkanein, aisi gehraiyaan, aisi tanhaiyaan, aur main… sirf main.Apne hone par mujhko yakeen aa gaya. 

(The moment seems to flow like a molten sapphire and the silence is as deep and blue as the ocean.Neither the earth is below, nor sky above.The rustling branches and leaves tell you that only you are here.Only I, my breath and my heartbeat. Endless depth, infinite loneliness and I…only I and it all makes me believe in my existence.)

-Zindegi Na Milegi Dobara (2011)