ghalb

गर तुझको है यकीन इजाबत दुआ ना मांग,
यानि बग़ैर यक दिल-ए बे मुददा ना मांग.
-ग़ालिब

If you are confident of acceptence, then pray for nothing.
Except for a heart that is free from desire ask nothing.

Translation from - Love and sonnets of Ghalib

हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है,
तुम्हीं कहो के ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है…

ना शोले में ये करिश्मा ना बर्क़ में ये अदा,
कोई बताओ कि वो शोखः-ए-तुंद-ख़ू क्या है…

यह रश्क है कि वो होता है हम-सुख़न तुमसे,
वागरना ख़ौफ-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदू क्या है…

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन,
हमारी जेब को अब हाजत-ए-रफू क्या है…

जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा,
कुरेदते हो जो अब राख, जूस्तजू क्या है…

रगों में दौड्ते फिरने के हम नहीं क़ायल,
जब आँख ही से ना टपका तो फिर लहू क्या है…

वो चीज़ जिसके लिए हमको हो बहिश्त अज़ीज़,
सिवाय बादा-ए-गुल-फाम-ए-मुश्कबू क्या है…

पियूं शराब अगर ख़ूं भी देख लूं दो चार,
यह शीशा-ओ-क़दा-ओ-कूज़ा-ओ-सूबू क्या है…

रही ना ताक़त-ए-गुफ़्तार, और अगर हो भी,
तो किस उम्मीद पे कहिए के आरज़ू क्या है…

हुआ है शाह का मुसाहिब, फिरे है इतराता,
वागरना शहर में ग़ालिब’ की आबरू क्या है…

-ग़ालिब

http://www.youtube.com/watch?v=bi6tSZFIf2o
Ghalib by Abida parveen “Har ek baat pe kehte ho”