dunagiri

हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। जम्मू के प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ की तरह ही यहां भी वैष्णवी माता की स्वयंभू सिद्ध पिंडि विग्रह मौजूद हैं। कहते हैं कि इन दोनों स्थानों पर अन्य शक्तिपीठों की तरह माता के कोई अंग नहीं गिरे थे, वरन माता यहां स्वयं उत्पन्न हुई थीं। जैव विविधता से परिपूर्ण इस बेहद पवित्र स्थान पर मृत व्यक्तियों को जीवित करने की क्षमता युक्त संजीवनी जैसी दिव्य जड़ी-बूटियों की उपस्थिति भी बताई जाती है। कहा जाता है कि त्रेता युग में राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण को शक्ति लगने पर हनुमान यहीं से संजीवनी बूटी लेकर लंका गए थे। वहीं द्वापर युग में पांडव इसी क्षेत्र में स्थित पांडुखोली नामक स्थान पर अज्ञातवास के दौरान रहे थे। पांडुखोली में कुमाऊं मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह भी है। कहते हैं कि उनके गुरु द्रोणाचार्य के तपस्या करने की वजह से ही यहां का नाम मूलतः द्रोणगिरि और अपभ्रंश दूनागिरि पड़ा। इसी क्षेत्र में गर्ग मुनि का आश्रम था, जिनकी तपस्या के प्रभाव से गगास नदी का उद्गम हुआ। यह स्थान शुकदेव एवं जमदग्नि जैसी ऋषियों की तपोभूमि भी रही। दूनागिरि शक्तिपीठ में वैष्णो देवी की तरह ही देवी ने उमा हैमवती का रूप धारण कर इंद्र आदि देवताओं को ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया था। विराट हिमालय की गगनचुंबी पर्वत शृंखलाओं के दृश्यों के साथ इस स्थान पर प्रकृति की छटा मन को मोहित कर आत्मविभोर करने के साथ ही भक्ति भाव व आध्यात्मिकता की अलौकिक अनुभूति जगाती है।
दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी और द्वाराहाट से 14 किमी की दूरी पर मंगलीखान नाम के स्थान पहुंचा जाता है। यहां से पैदल सीढ़ियां मंदिर तक पहुंचाती हैं। दूनागिरि को माता वैष्णवी का गोपनीय शक्तिपीठ माना जाता है, और इसी कारण 51 शक्तिपीठों में इसकी गणना नहीं की जाती। कहते हैं कि पद्य नाम के कल्प में असुरों से पराजित इंद्र आदि देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु के शरीर से दिव्य तेजपुंज के रूप में ‘वैष्णवी शक्ति’ का जन्म हुआ था। इस शक्तिपीठ की गणना शक्ति के प्रधान उग्र पीठों में भी होती है। वहीं स्कंद पुराण के ‘मानस खंड’ के द्रोणाद्रिमाहात्म्य के अनुसार यह देवी शिव की शक्ति है जिसे ‘महामाया हरिप्रिया’ और सिंह वाहिनी दुर्गा और ‘वह्निमती’ के रूप में भी जाना जाता है। कत्यूरी राजाओं ने दूनागिरि देवी के अव्यक्त विग्रहों को रूपाकृति प्रदान की, तथा मंदिर में गणेश, शिव एवं पार्वती के कलात्मक भित्ति चित्रों को स्थापित किया।
वैष्णवी शक्तिपीठ होने के कारण ही यहां किसी प्रकार की पशु बलि नहीं चढ़ाई जाती, यहां तक कि नारियल भी मंदिर परिसर में नहीं तोड़ा जाता है। मंदिर में अखंड ज्योति लगातार जलती रहती है। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। आश्विन मास के नवरात्रों में दुर्गाष्टमी को यहां श्रद्धालुओं का बहुत बड़ा मेला लगता है। क्षेत्र के सभी नवविवाहित युगल यहां नियमपूर्वक आकर अपने सुखी दांपत्य जीवन के लिए तथा अन्य लोग माता की कृपा-आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं। निःसंतान दंपति पूरी रात्रि हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर खड़े होकर तपस्या कर संतान प्राप्त करते हैं। रह कर मनौती मांगती हैं। और मनौती पूरी होने पर अपने नवजात शिशु को लेकर माता के दर्शन को आती हैं।

रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि http://wp.me/s4N9BD-dunagiri हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। जम्मू के प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ की तरह ही यहां भी वैष्णवी माता की स्वयंभू सिद्ध पिंडि विग्रह मौजूद हैं। कहते हैं कि इन दोनों स्थानों पर अन्य शक्तिपीठों की तरह माता के कोई अंग नहीं गिरे थे, वरन माता यहां स्वयं उत्पन्न हुई थीं। जैव विविधता से परिपूर्ण इस बेहद पवित्र स्थान पर मृत व्यक्तियों को जीवित करने की क्षमता युक्त संजीवनी जैसी दिव्य जड़ी-बूटियों की उपस्थिति भी बताई जाती है। कहा जाता है कि त्रेता युग में राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण को शक्ति लगने पर हनुमान यहीं से संजीवनी बूटी लेकर लंका गए थे। वहीं द्वापर युग में पांडव इसी क्षेत्र में स्थित पांडुखोली नामक स्थान पर अज्ञातवास के दौरान रहे थे। पांडुखोली में कुमाऊं मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह भी है। कहते हैं कि उनके गुरु द्रोणाचार्य के तपस्या करने की वजह से ही यहां का नाम मूलतः द्रोणगिरि और अपभ्रंश दूनागिरि पड़ा। इसी क्षेत्र में गर्ग मुनि का आश्रम था, जिनकी तपस्या के प्रभाव से गगास नदी का उद्गम हुआ। यह स्थान शुकदेव एवं जमदग्नि जैसी ऋषियों की तपोभूमि भी रही। दूनागिरि शक्तिपीठ में वैष्णो देवी की तरह ही देवी ने उमा हैमवती का रूप धारण कर इंद्र आदि देवताओं को ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया था। विराट हिमालय की गगनचुंबी पर्वत शृंखलाओं के दृश्यों के साथ इस स्थान पर प्रकृति की छटा मन को मोहित कर आत्मविभोर करने के साथ ही भक्ति भाव व आध्यात्मिकता की अलौकिक अनुभूति जगाती है। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी और द्वाराहाट से 14 किमी की दूरी पर मंगलीखान नाम के स्थान पहुंचा जाता है। यहां से पैदल सीढ़ियां मंदिर तक पहुंचाती हैं। दूनागिरि को माता वैष्णवी का गोपनीय शक्तिपीठ माना जाता है, और इसी कारण 51 शक्तिपीठों में इसकी गणना नहीं की जाती। कहते हैं कि पद्य नाम के कल्प में असुरों से पराजित इंद्र आदि देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु के शरीर से दिव्य तेजपुंज के रूप में ‘वैष्णवी शक्ति’ का जन्म हुआ था। इस शक्तिपीठ की गणना शक्ति के प्रधान उग्र पीठों में भी होती है। वहीं स्कंद पुराण के ‘मानस खंड’ के द्रोणाद्रिमाहात्म्य के अनुसार यह देवी शिव की शक्ति है जिसे ‘महामाया हरिप्रिया’ और सिंह वाहिनी दुर्गा और ‘वह्निमती’ के रूप में भी जाना जाता है। कत्यूरी राजाओं ने दूनागिरि देवी के अव्यक्त विग्रहों को रूपाकृति प्रदान की, तथा मंदिर में गणेश, शिव एवं पार्वती के कलात्मक भित्ति चित्रों को स्थापित किया। वैष्णवी शक्तिपीठ होने के कारण ही यहां किसी प्रकार की पशु बलि नहीं चढ़ाई जाती, यहां तक कि नारियल भी मंदिर परिसर में नहीं तोड़ा जाता है। मंदिर में अखंड ज्योति लगातार जलती रहती है। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। आश्विन मास के नवरात्रों में दुर्गाष्टमी को यहां श्रद्धालुओं का बहुत बड़ा मेला लगता है। क्षेत्र के सभी नवविवाहित युगल यहां नियमपूर्वक आकर अपने सुखी दांपत्य जीवन के लिए तथा अन्य लोग माता की कृपा-आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं। निःसंतान दंपति पूरी रात्रि हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर खड़े होकर तपस्या कर संतान प्राप्त करते हैं। रह कर मनौती मांगती हैं। और मनौती पूरी होने पर अपने नवजात शिशु को लेकर माता के दर्शन को आती हैं।
Kwari Pass. Grandee Curzon Trail Trekking

Trekking in India is altogether a unique affection which gives an adventurous person thrill in place of the life. She is intendment touching fulfillment being the trekker. There are a fortiori three types of Trekking programmes. Standard -These depend on the taste on the client that is what kind of trekking ruling class are looking for,
Norma l- These are followed on the conventional routes drag the Himalayas.
Spiny - These are high altitudes, tough and longer persistency ill-bred trails and indeed more fun and thrill.
The Pass (Khal) is approached through a wrinkle scalawag track at an elevation of 4265 mts. Standing at the Kwari-Pass opposite to north, the vision sweeps-the Kedarnath, Chaukhamba, Nilkhantha, Kamet, Gauri Parbat, Hathi Parbat, Nandadevi, Bethartoli, Dunagiri, etc. all arranged vestibule a humorsome arc- southwards the foothills stretch half-mast upon on to dim haze of the distant plains one of the most come-hither trek in the Garhwal beat. The trek passes through forests of steel and conifer, bamboo and birch, teeming with a the theater in relation to animals and birds life.A trekker might even be lucky enough into come across leopard pugmarks or a Himalayan black bear near this trail. Lord Curzon went up to the Kwari-pass in 1905 and hence the trek is denominate after himas “Lord Curzon Trail”.We at countrywide tours and travels instrumentate all kinds of treks in india.We are one of the current providers pertinent to ultra fittings with the immaculate services at competitive and affordable price.our team of skilled offer a grand range as regards tour services Our core norm is gratefulness, trust worthy & comfit, which we are sure will hole on account of ever lasting association with our valuable clients way out the arena in point of modern tourism and travels.We at trekinindia.in are available to offer customized, tailormade solutions on bolster plan your vacation. We are much more than somebody service representatives yellowness roll on agents–We are experts on the ins and outs in point of all the destinations and activities uncoerced on our site. We give the ax favor you settle upon the vacation that best meets your needs and Budget; bear upon quantitative questions subliminal self may have about a particular destination arms method; advise on gear, apparel, and access we are there 24 hrs 7 days a week. Holy concerning the asserted priorities of the company is in promoting Eco-tourism, Ecology and Care for Nature!trekinindia.in endow limited range of offers in India and verbose range on facilities to its clientele from across the western hemisphere. At this time we are proud on place before a few of them:-Cultural, Adventure, Animality and many more tours of Uttaranchal, Himachal & Nepal.Safari: Jackal and Jeep SafariTrekking:Water Sports: Canoeing and Kayaking, White Water Rafting,AnglingParagliding Camping Skiing RockClimbing\Rappeling Piles BikingAyurveda, Yoga Meditation Health and Rejuvenation Tours.Car and vehicle rentals.