माउसोलस का मकबरा - ताजमहल की तरह प्यार की निशानी

माउसोलस का मकबरा – ताजमहल की तरह प्यार की निशानी

इस पृथ्वी पर समय-समय पर अनेक स्मृति चिन्ह बने हैं। उनमें से कितने ही तो काल के निष्ठर थपेडों को सहते-सहते अपना निशान तक मिटा गये है और उनमें से कितने ही आज भी मौजूद है। पर जो मिट गये उनका नाम नही मिटा है, उनकी स्मृतियां आज भी इतिहास के पृष्ठों में अमिट और सुरक्षित हैं। पिछले लेख में हमने संसार के एक अदभूत समाधि मंदिर (मकबरे) का उल्लेख किया है। जिस प्रकार शहंशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की…

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बेबीलोन हैंगिंग गार्डन - बेबीलोन की प्रमुख विशेषताएं क्या थी?

बेबीलोन हैंगिंग गार्डन – बेबीलोन की प्रमुख विशेषताएं क्या थी?

बेबीलोन को यदि हम स्वर्ण नगरी की समता मे रखें तो यह कोई अत्युक्ति नहीं होगी। एक जमाना था कि कृत्रिम एवं प्राकृतिक सौन्दर्यो की इस नगरी में भरमार थी। पर जैसे परमात्मा को अपनी कृति के सम्मुख उतने साज सौन्दर्य में कोई मानवी कृति पसन्द नहीं, इसीलिये इस स्वर्ण नगरी बेबीलोन के कृत्रिम अद्भुत सौन्दर्य अब केवल इतिहास के पृष्ठों ही में समाहित रह गये हैं। बेबीलोन आज भी है, वहां के पर्वत, नदी और झीलें आज भी…

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अपोलो की मूर्ति का रहस्य क्या आप जानते हैं? वे आश्चर्य

अपोलो की मूर्ति का रहस्य क्या आप जानते हैं? वे आश्चर्य

पिछले लेख में हमने ग्रीक देश की कला मर्मज्ञता का उल्लेख किया है। जियस की विश्वप्रसिद्ध मूर्ति इसी देश के महान कलाकार की अलौकिक कृति थी। अब हम इसी देश की एक दूसरी आश्चर्य जनक वस्तु का उल्लेख कर रहे हैं। भूमध्य सागर में एक टापू है जिसका नाम “रोड्स द्वीप! है। इस द्वीप के इतिहास से पता चलता है कि सर्वप्रथम यूनान के लोग ही यहां पर पहुँचे थे और अपने निवास के लिए मकान आदि बनवाये थे। वे वीर और साहसी थे…

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एलोरा और अजंता की गुफाएं किस लिए विख्यात है?

एलोरा और अजंता की गुफाएं किस लिए विख्यात है?

संसार के महान आश्चर्यों में भारत में एलोरा और अजंता के गुफा मन्दिर अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन गुफाओं मे जो चित्रकारी की गई है, उन्हे देखने से ही इनकी महानता का वास्तविक मूल्याकन हो सकता है। संसार के अन्य देशों में भी अनेक गुफा मन्दिर हैं पर एलोरा और अजंता से उनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। अब तक संसार के भिन्‍न-भिन्‍न देशो के हजारों और लाखों कलाकार एव विद्वानों ने इन गुफा मन्दिरों को देखा है…

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जियस की मूर्ति - ओलंपिया में जियस की मूर्ति जिसको बनाने वाले को खुद आश्चर्य हुआ

जियस की मूर्ति – ओलंपिया में जियस की मूर्ति जिसको बनाने वाले को खुद आश्चर्य हुआ

जिस प्रकार एशिया महाद्वीप मे भारत अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृत के लिये संसार में अग्रणी माना जाता है, उसी प्रकार यूरोपीय महाद्वीप में ग्रीस एवं रोम सभ्यता और संस्कृति के आदि गुरु समझे जाते हैं। ग्रीस देश की सभ्यता बहुत ही प्राचीन है। इस देश ने भौतिक संसार को बहुत कुछ सीख दी है। एक जमाना था कि जब इस देश की पताका संस्कृति और सभ्यता के क्षेत्र में काफी ऊंची लहरा रही थी। उसी की बानगी है ओलंपिया में…

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चीन की दीवार कितनी चौड़ी है, चीन की दीवार का रहस्य

चीन की दीवार कितनी चौड़ी है, चीन की दीवार का रहस्य

प्राचीन काल से ही संसार के सभ्य देशों में चीन का स्थान अग्रणी था। कहते हैं चीन ही वह देश है जिसने विश्व को सभ्यता की प्रारम्भिक शिक्षा दी थी। हमारे वैदिक युग के साहित्य मे भी इस देश की गौरव गरिमा की अनेक गाथाएँ यत्र-तत्र बिखरी पड़ी है। यहाँ के निवासी दस्तकारी और कारीगरी में संसार के अन्य देशों के गुरु समझे जाते थे। अब भले ही यूरोप आदि महाद्वीप के विभिन्‍न देश अपनी विद्वता और कला-कौशल का बोल पीटते…

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श्री हंस जी महाराज की जीवनी - श्री हंस जी महाराज के गुरु कौन थे

श्री हंस जी महाराज की जीवनी – श्री हंस जी महाराज के गुरु कौन थे

श्री हंस जी महाराज का जन्म 8 नवंबर, 1900 को पौढ़ी गढ़वाल जिले के तलाई परगने के गाढ़-की-सीढ़ियां गांव में हुआ था। उनके पिता रणजीत सिंह ने उनका नाम हंसा राम सिंह रखा। वे एक संपन्‍न किसान थे। हंसा राम सिंह की मां कालिन्दी देवी एक दयालु और धर्मशील महिला थीं। वे भगवान शिव और देवी पार्वती की उपासिका थीं। हंसा रामसिंह नाम में ‘हंसा’ शब्द देवी सरस्वती के वाहन हंस से तनिक संबंध न था। रामसिंह के चेहरे पर…

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संत बूटा सिंह जी और निरंकारी मिशन, गुरु और शिक्षा

संत बूटा सिंह जी और निरंकारी मिशन, गुरु और शिक्षा

हिन्दू धर्म में परमात्मा के विषय में दो धारणाएं प्रचलित रही हैं- पहली तो यह कि परमात्मा निर्गुण निराकार ब्रह्म है अर्थात वह नाम, रूप और गुण रहित सर्वोच्च चेतना है तथा दूसरी यह है कि परमात्मा सगुण साकार ब्रह्म है। भारत के महानतम दृष्टाओं, संतों और गुरुओं में से एक गुरुनानक देव निराकार ब्रह्म की धारणा के प्रबल समर्थक थे। निराकार ब्रह्म की धारणा में विश्वास रखने वाले लोग यह मानते हैं कि ईश्वर…

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स्वामी प्रभुपाद - श्री भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी

स्वामी प्रभुपाद – श्री भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी

हम सब लोगों ने यह अनुभव प्राप्त किया है कि श्री चैतन्य महाप्रभु की शिष्य परंपरा में आध्यात्मिक गुरु किस प्रकार प्रकट होते हैं। हमारे गुरु ने हमें यह कहकर धोखा नहीं दिया कि मैं ईश्वर हूं, मैं भगवान हूं।” इसके विपरीत उन्होंने यह सिद्ध किया कि वे प्रभु के सेवक हैं और हमें यह पहचानना सिखलाया कि वास्तव में ईश्वर कौन है, हम कौन हैं और हम अपने घर अर्थात्‌ कृष्ण की ओर किस प्रकार लौट सकते हैं? श्री स्वामी…

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महर्षि महेश योगी का जीवन परिचय और भावातीत ध्यान

महर्षि महेश योगी का जीवन परिचय और भावातीत ध्यान

मैं एक ऐसी पद्धति लेकर हिमालय से उतरा, जो मनुष्य के मन और हृदय को उन, ऊंचाइयों तक ले जा सकती है, जहां वास्तविक ज्ञान और वास्तविक मानवीय प्रकृति को पूरी तरह आत्मसात किया जा सकता है। मैं अपनी इस पद्धति को ध्यान कहता हूं, परंतु वास्तव में यह भीतर की खोज का मार्ग है। इस पद्धति द्वारा मनुष्य अपने अस्तित्व की उन अंतर्याम गहराइयों में पहुंच सकता है, जिनमें जीवन, सार-तत्त्व और समूचे अस्तित्व अर्थात्‌…

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स्वामी मुक्तानंद जी महाराज - स्वामी मुक्तानंद सिद्ध योग गुरु

स्वामी मुक्तानंद जी महाराज – स्वामी मुक्तानंद सिद्ध योग गुरु

ईश्वर की प्राप्ति गुरु के बिना असंभव है। ज्ञान के प्रकाश से आलोकित गुरु परब्रह्म का अवतार होता है। ऐसे गुरु की दिव्य कृपा प्राप्त करने की चेष्टा करनी चाहिए। जब तक गुरु-कृपा से कुंडलिनी शक्ति जागृत नहीं होती तब तक हमारे हृदय में प्रकाश नहीं हो सकता, दिव्य-ज्ञान प्रदान करने वाला अंतर्चक्षु नहीं खुल पाता और हमारे बंधन समाप्त नहीं हो सकते। आंतरिक विकास, दिव्यत्व की प्राप्ति और परा-शिव की अवस्था तक…

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श्री महाप्रभु जी - श्री दीपनारायण महाप्रभु जी और योग वेदांत समाज

श्री महाप्रभु जी – श्री दीपनारायण महाप्रभु जी और योग वेदांत समाज

भारत में राजस्थान की मिट्टी ने केवल वीर योद्धा और महान सम्राट ही उत्पन्न नहीं किये, उसने साधुओं, संतों, सिद्धों और गुरुओं को भी जन्म दिया। ऐसे ही एक महान दिव्य पुरुष श्री दीपनारायण जी थे, जिनको उनके शिष्य महाप्रभु जी कहकर संबोधित करते थे।   श्री महाप्रभु जी का जन्म स्थान, शिक्षा और माता पिता   श्री दीपनारायण जी का जन्म नागौर जिले के हरिवासिनी गांव में हुआ था और उनका बचपन का नाम दीपपुरी था।…

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मेहेर बाबा इन हिन्दी - मेहेर बाबा का जीवन परिचय कहानी

मेहेर बाबा इन हिन्दी – मेहेर बाबा का जीवन परिचय कहानी

में सनातन पुरुष हूं। मैं जब यह कहता हूं कि मैं भगवान हूं, तब इसका यह अर्थ नहीं है कि मैंने इस बारे में सोचकर तय किया है कि मैं भगवान हूं। मुझे ज्ञात ही है कि मैं भगवान हूं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए यह कहना कि मैं ईश्वर हूं, ईश्वर का अपमान है, परंतु सत्य यह है कि यदि मैं यह न कहूं कि मैं भगवान हूं तो यह ईश्वर का अपमान होगा। ” “मैं मनुष्यों के बीच दिव्य पुरुष के रूप में उपस्थित…

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साईं बाबा का जीवन परिचय - साईं बाबा का जन्म कहां हुआ था

साईं बाबा का जीवन परिचय – साईं बाबा का जन्म कहां हुआ था

श्री साईं बाबा की गणना बीसवीं शताब्दी में भारत के अग्रणी गरुओं रहस्यवादी संतों और देव-परुषों में की जाती है। उनके अनुयायी उन्हें ईश्वर का अवतार, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और सर्वव्यापी मानते हैं। वे अपने जीवन काल में ही गाथा-पुरूष बन गये थे तथा आज भी समुचे विश्व में उनके अनुयायियों और उपासकों की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि होती जा रही है। समुचे भारत में उनके मंदिर स्थापित हुए हैं तथा वे देश के उन…

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1947 की क्रांति इन हिन्दी - 1947 भारत की आजादी के नेता

1947 की क्रांति इन हिन्दी – 1947 भारत की आजादी के नेता

19 वीं शताब्दी के मध्य से भारत मे “स्वदेशी” की भावना पनपने लगी थी। कांग्रेस की स्थापना, गोखले और तिलक की राजनीति, भगत सिह और चंद्रशेखर आजाद की क्रांतिकारी कार्यवाहियां, गांधी जी का सत्याग्रह और आखिर में 1942 के “भारत छोडों आदोलन” ने इस भावना को एक विचारधारा का रूप देते हुए क्रमशः पूर्ण आजादी की मंजिल तक पहुचाया। असंख्य लोगो ने कुर्बानियां दी, जेलों की यातनाएं सही पर अंग्रेजों के सामने सिर न…

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वियतनाम की क्रांति कब हुई थी - वियतनाम क्रांति के कारण और परिणाम

वियतनाम की क्रांति कब हुई थी – वियतनाम क्रांति के कारण और परिणाम

वियतनाम के किसानों ने ही ची मिन्ह और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में आधी सदी तक साम्राज्यवाद से लोहा लेकर अपने देश को स्वाधीन किया। राष्ट्रीय मुक्ति-संग्रामों के इतिहास मे इस महान संघर्ष की गाथा स्वर्ण अक्षरों में लिखी जा चुकी है। वियतनाम ने फ्रांसीसी, ब्रिटिश, जापानी और अमेरीकी साम्राज्यवादी इरादों को धूल मे मिलाकर सारी दुनिया को आजादी के लिए जूझते रहने की प्रेरणा दी। वियतनामियों के इसी जन…

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क्यूबा की क्रांति कब हुई थी - क्यूबा की क्रांति के नेता कौन थे

क्यूबा की क्रांति कब हुई थी – क्यूबा की क्रांति के नेता कौन थे

फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में हुई क्यूबा की क्रांति संग्राम ने अब लोक कथाओं में स्थान पा लिया है। मात्र 82 क्रांतिकारियों ने तानाशाह बटिस्टा की सुसज्जित सेना से लोहा लेना शुरू किया और तीन साल से भी कम समय में बेमिसाल जीत हासिल की। इस जीत में कास्त्रो के लेफ्टिनेंट थे– चे गुएवारा, राउल कास्त्रो और सिमेलो। क्यूबा के किसानों ने क्रांतिकारियों का दिल खोलकर साथ दिया। अमेरिकी साम्राज्यवाद की गर्व से…

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चीन की क्रांति किस वर्ष हुई थी - चीन की क्रांति के कारण और परिणाम

चीन की क्रांति किस वर्ष हुई थी – चीन की क्रांति के कारण और परिणाम

द्वितीय विश्व-युद्ध के फलस्वरूप गरहराये अंतरराष्ट्रीय संकट ने दुनिया में परिवर्तन की तेज लहर पैदा कर दी थी। रूसी क्रांति की सफलता ने एशिया के कई देशों में कम्युनिस्टों को क्रांति के लिए प्रेरित किया। चीन में माओ चतुड चूं और चाओ अनलाए और ल्यू शाआछी ने मिलकर क्रांति की एक नवीन पद्धति ईजाद की, जिसे दीर्घकालीन प्रतिरोध युद्ध के जरिए इलाकावार सत्ता दखल करते हुए नवजनवादी क्रांति करने के सिद्धांतों के…

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इटली का एकीकरण कब हुआ था - इटली की क्रांति कारण और परिणाम

इटली का एकीकरण कब हुआ था – इटली की क्रांति कारण और परिणाम

इतालवी क्रांति या इटली की क्रांति को दुनिया इटली के एकीकरण आंदोलन के नाम से जानती है। यह एक तरह से त्रिकोणीय संघर्ष था। एक ओर आस्ट्रियाई और फ्रांसीसी फौजों की ताकत थी, दूसरी ओर राजा इमानुएल और प्रधानमंत्री काउण्ट कैवर की शकुनि नूमा चाले थी और तीसरी ओर गैरीवाल्डी और मेजिनी जैसे समर्पित क्रांतिकारी थे। इटली की किसान जनता ने गैरीबाल्डी को अपना भरपूर प्यार दिया। जहां जहां उनके लाल कुर्ती के सवार गये,…

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तुर्की की क्रांति कब हुआ - तुर्की की क्रांति के कारण और परिणाम

तुर्की की क्रांति कब हुआ – तुर्की की क्रांति के कारण और परिणाम

400 वर्ष पुराने ओटोमन तुर्क साम्राज्य के पतन के बाद तुर्की के फौजी अफसरों और जनता में राष्ट्रवादी महत्त्वाकांक्षाएं पनपने लगी। वे खलीफा और सुल्तानों के मध्ययुगीन शासन से अपने देश को मुक्त कराकर खुली हवा मे सांस लेना चाहते थे। कमाल अता तुर्क यह सपना देखने वालों के अग्रणी नेता थे। तुर्की की क्रांति ने न केवल इस राष्ट्र को अपनी प्राकृतिक सीमाओं मे सुरक्षित किया बल्कि सोच-विचार और समाज नीति का…

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